एक थैला सीमेंट : याशिकी हायामा; अनुवाद: अज्ञेय

यहाँ प्रस्तुत पाठ का एक सहज, भावपूर्ण और डायरी/हस्तलिखित शैली (Handwritten / Narrative flow) में पुनरीक्षण है, जिसमें मूल भाव को बनाए रखते हुए भाषा की वर्तनी और प्रवाह को सुव्यवस्थित किया गया है:

सीमेंट के थैले से निकली चिट्ठी

योशिजो लगातार सीमेंट के थैले खाली कर रहा था। शरीर के बाकी हिस्सों को तो उसने किसी तरह धूल से बचा लिया था, पर बालों और मूँछों पर सीमेंट की एक मोटी पपड़ी जम चुकी थी। नासापुटों के भीतर बाल सलाखों जैसे कड़े हो गए थे और वह नाक साफ़ करने के लिए छटपटा रहा था; लेकिन सीमेंट घोलने वाला यंत्र हर मिनट दस खेपें तैयार कर रहा था—काम में ज़रा-सी भी ढील देने की कोई गुंजाइश नहीं थी।

ग्यारह घंटे की इस हाड़-तोड़ दिनचर्या में उसे सुस्ताने तक की फुर्सत नहीं मिलती थी। दोपहर की संक्षिप्त छुट्टी में वह जैसे-तैसे कौर निगलता। तीसरे पहर भी जब विश्राम की उम्मीद बंधी, तो पता चला कि उसी दौरान मशीन की सफ़ाई करनी है। शाम ढलते-ढलते ऐसा लगने लगा मानो उसकी पूरी नाक ही सीमेंट में तब्दील हो चुकी हो। बाहें थकान से जवाब दे रही थीं।

तभी, एक थैला उठाते हुए उसकी नज़र सीमेंट के बीच दबे एक छोटे से लकड़ी के डिब्बे पर पड़ी।

'क्या हो सकता है यह?'

कुतूहल तो हुआ, मगर मशीन की रफ्तार धीमी नहीं की जा सकती थी। उसने झटपट सीमेंट का नाप भरा, खाँचे में डाला, और डिब्बे को चुपचाप उठाकर अपने लबादे की जेब में सरका लिया। फिर बेल्चा उठाकर उसी यांत्रिक गति से जुट गया।

काम खत्म हुआ। योशिजो ने रबर की नली से किसी तरह हाथ-मुँह धोया, नाश्ते का डिब्बा गले में लटकाया और अपनी कोठरी की ओर चल पड़ा। मन में बस दो ही तलब थीं—पेट में कुछ दाना पड़ जाए और हलक से तेज़ 'साके' (शराब) का एक घूंट उतर जाए।

बिजलीघर की नई इमारत के पास से गुज़रते हुए शाम की बर्फीली हवा ने उसके पसीने से भीगे बदन में कंपकंपी भर दी। पास ही बहती पहाड़ी नदी की घरघराहट के बीच अचानक उसे अपनी गर्भवती पत्नी का ख़याल आया।

'फिर एक नया बच्चा!'

कोठरी में पहले से बिलबिलाते छह बच्चे, जाड़ों के अंत तक आने वाला सातवाँ बच्चा और रोज़ की महज १ येन ९० सेन की मज़दूरी... चावल और रोज़मर्रा के खर्च के बाद शराब तक के पैसे नहीं बचते थे। एक गहरी उदासी ने उसे घेर लिया।

तभी उसे जेब में रखे डिब्बे की याद आई। उसने पतलून से रगड़कर उस पर जमी सीमेंट साफ़ की। डिब्बा बड़ी मुस्तैदी से सीलबंद था। पत्थर पर पटकने से जब वह नहीं खुला, तो खीझकर योशिजो ने उसे सड़क पर एड़ियों से कुचल डाला।

लकड़ी टूटते ही कपड़े के एक चिथड़े में लिपटा काग़ज़ बाहर निकला। योशिजो ने उसे उठाया और पढ़ने लगा:

"मैं नूमुरा सीमेंट कंपनी में मज़दूरी करती हूँ। मेरा काम खाली थैले सीना है।

जिस नौजवान से मेरी सगाई हुई थी, वह इसी कारखाने में पत्थरों की पिसाई वाली मशीन पर तैनात था। सात अक्टूबर की सुबह, एक बड़ा पत्थर डालते समय उसका पाँव कीचड़ में फिसल गया और वह सीधे मशीन के भीतर जा गिरा।

साथियों की तमाम कोशिशों के बावजूद वह पत्थरों के साथ भीतर धँसता चला गया। उसका जिस्म पत्थरों संग पिस गया... और दूसरी तरफ नली से जो चूरा निकला, वह हल्का गुलाबी था। वह चूरा फिर महीन चक्की के पाटों के नीचे पिसा, भट्ठी की आग में पका और आखिरकार सीमेंट बनकर बाहर आया।

उसकी हड्डियाँ, उसका माँस, उसका मन—सब पिसकर राख हो गए। मेरा होने वाला पति अब केवल मुट्ठी भर सीमेंट बनकर रह गया है। पीछे छूटा तो बस उसकी पोशाक का यह एक चिथड़ा।

आज दिन भर मैं वही थैले सीती रही हूँ, जिनमें उस खेप का सीमेंट भरा जाना था। यह ख़त लिखकर मैं उसी थैले में डाल रही हूँ।

क्या तुम जो इसे पढ़ रहे हो, एक मज़दूर हो? अगर हाँ, तो मुझ अभागन को जवाब ज़रूर देना। मैं जानना चाहती हूँ कि इस थैले का सीमेंट कहाँ इस्तेमाल हुआ? क्या तुम राजमिस्त्री हो या पलस्तर करने वाले?

मेरा दिल नहीं मानता कि वह किसी आलीशान इमारत या थिएटर की दीवार में समा जाए... पर मेरे चाहने से क्या होता है! जहाँ मर्ज़ी हो, इसे लगा देना। वह बड़ा सीधा और मेहनती था; जहाँ भी रहेगा, पूरी वफ़ादारी से उस दीवार को थामे रखेगा।

वह अभी कुल पच्चीस साल का नौजवान था। मुझे तो यह जानने का मौक़ा भी न मिला कि वह मुझसे कितना प्यार करता था, और आज मैं उसके कफ़न के रूप में सीमेंट के थैले सी रही हूँ। उसकी कोई क़ब्र भी नहीं, जहाँ जाकर मैं दो बूँद आँसू बहा सकूँ।

अगर तुम मज़दूर हो, तो मेरी ख़ातिर इतना ज़रूर करना—मुझे लिख भेजना कि यह सीमेंट किस तारीख़ को, किस शहर में और किस दीवार में लगा? बदले में मैं तुम्हें उसकी पोशाक का यह टुकड़ा भेज रही हूँ, जिसमें उसके जिस्म का पसीना और पत्थरों का चूरा बसा है। यही वह लिबास था जिसे पहनकर उसने कभी मुझे गले लगाया था।

तुम भी अपना ख़याल रखना। काम के दौरान सावधानी बरतना... नमस्कार।"

बच्चों के शोरगुल से योशिजो की तंद्रा टूटी। वह अपनी कोठरी में आ चुका था।

उसने एक बार फिर काँपते हाथों से चिट्ठी के अंत में लिखा पता देखा। फिर सामने रखे प्याले से तेज़ 'साके' का घूंट एक ही सांस में हलक के नीचे उतार लिया।

"तो आप नशे में धुत्त होने लगे?" पास खड़ी पत्नी ने तल्ख़ आवाज़ में टोका, "आपके पास तो नशा करने की सहूलियत है, पर इन बच्चों के पेट का क्या?"

योशिजो ने चुपचाप पत्नी के उभरे हुए पेट की ओर देखा, और उसकी नज़रों के सामने आने वाले सातवें बच्चे का चेहरा और सीमेंट की भट्ठी का मंज़र एक साथ तैर गया।